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चलते-रुकते, जलते-बुझते
खो गया तुम्हारा साया
काल की काली अलका
बीच-
लिए अंतहीन इच्छा आँखों में
अथाह प्रेम समंदर
हृदय में
अनसुनी कथा समेटे अनुभव में
अनजानी चिंता सी हर लय में,
फिर भी अभी है एक आभास,
तुम्हारी चरमराती हुई पदचाप,
तुम्हारी सलवटी हंसी की वो थाप
और कहीं शून्य में
डूबी सी
तुम्हारी दृष्टि लिए
कई सवाल…..
झटकते रहे भीड़ के बीच
तुम्हारे न होने
का दर्द
पर कहीं सूने कोने
में
बसा रहा तुम्हारा
ही मौन
करता रहा हमसे बातें
जगा कर सोती उदास रातें
हाँ....अभी भी है एक आभास
तुम्हारे होने का…….यहीं कहीं पास …….।।
--शिवाली

और कहीं शून्य में डूबी सी
ReplyDeleteतुम्हारी दृष्टि लिए कई सवाल…..
Exceptional expression