Monday, 28 January 2013

प्रतीक्षा में.....

image@google

तेरी पलकों से टपकी बूँद
जो ठहरी थी आकर मेरे गाल पर,
पोंछा नहीं अभी तक उसे मैंने
शायद प्रतीक्षा में तेरी मुस्कान की....

सूख कर भी वो दिलाती है एहसास
तेरे दुःख की आद्रता का,
भीगे अन्तर्मन की प्यास का,
डूबते इस मन के द्वंद का-
कि कैसे पहनाऊं तुझे फिर से
उन्मुक्त हंसी का वही कंगन
जो खनक जाता था मेरी
हर धीमी सी भी आहट पर
और सुलझा जाता था हृदय की
कितनी अनजानी सी उलझन…..??

गर कर सके विश्वास का फेरा
थामे हुए इस प्रीत का दामन,
कुछ पल के हैं ये गहरे बादल
छंट जायेंगे जाते ही सावन,
रह जाएगी इन रेशमी आँखों में
फिर वही निर्मलता, वही शीतलता,
निखरी हुई फिर वही पारदर्शिता,
शायद देख पायेगी तब तू मुझे
खारे पानी के धुंधलके से परे
खड़े प्रतीक्षा में तेरी मुस्कान की……!!
                                                                                                                                     -शिवाली


No comments:

Post a Comment